The story
नमस्कार, मैं हूँ अव्शा, आपकी टूर नरेटर। आज हम जॉर्डन के मान प्रांत के उस तपते हुए रेगिस्तान के बीच खड़े हैं, जहाँ इतिहास अपनी ख़ामोशी में भी चीख-चीख कर अपनी महानता बयां करता है। पेट्रा, जिसे दुनिया 'रोज़ रेड सिटी' यानी गुलाबी शहर के नाम से जानती है। यह सिर्फ पत्थरों का एक ढेर नहीं है, बल्कि दो हज़ार साल पहले नबाती कबीले के लोगों द्वारा चट्टानों के सीने को चीरकर लिखी गई एक कविता है। जैसे ही हम अपनी यात्रा शुरू करते हैं, हमारे सामने आता है 'अल-सीक'। यह एक संकरा, घुमावदार और लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबा रास्ता है, जिसकी दीवारें अस्सी मीटर ऊँची हैं। यहाँ चलते हुए आपको ऐसा महसूस होगा जैसे आप पहाड़ों के पेट के अंदर समा गए हैं। गौर से देखिए इन दीवारों को, यहाँ आपको गुलाबी, लाल और नारंगी रंगों की ऐसी धारियां दिखेंगी जो किसी कलाकार की कूची से बनी जान पड़ती हैं। किनारे पर बनी उन बारीक नालियों को देखिए, जो बताती हैं कि नबाती लोग रेगिस्तान के इस सूखे इलाके में भी पानी के प्रबंधन में कितने माहिर थे। जैसे ही हम इस संकरी घाटी के मुहाने पर पहुँचते हैं, अंधेरे से निकलकर अचानक एक सुनहरी रोशनी हमारी आँखों को चौंधिया देती है। सामने खड़ा है 'अल-खज़़नेह' यानी द ट्रेजरी। यह पेट्रा की सबसे प्रतिष्ठित इमारत है। इसे ऊपर से नीचे की ओर सीधे पहाड़ की चट्टान को काटकर बनाया गया है। कल्पना कीजिए उन कारीगरों की, जिन्होंने बिना किसी आधुनिक मशीन के इस चालीस मीटर ऊँचे ढांचे को इतनी बारीकी से तराशा होगा। स्थानीय बेडौइन कहानियों के अनुसार, इसके शीर्ष पर बने कलश में कभी प्राचीन मिस्री राजाओं का खज़ाना छिपा था। लेकिन पेट्रा सिर्फ इस एक इमारत तक सीमित नहीं है। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ते हैं, शहर और भी विशाल होता जाता है। यहाँ का रोमन शैली का थिएटर देखिए, जो पहाड़ को काटकर बनाया गया था और जिसमें कभी सात हज़ार लोग एक साथ बैठते थे। आसपास की पहाड़ियों में हज़ारों गुफाएं और मकबरे हैं, जहाँ कभी हज़ारों की आबादी रहा करती थी। यह शहर मसालों, धूप और रेशम के व्यापार का एक मुख्य केंद्र था, जहाँ रोम, ग्रीस और मिस्र की संस्कृतियाँ आपस में मिलती थीं। अगर आप में थोड़ा और साहस है, तो आठ सौ सीढ़ियाँ चढ़कर 'अद-दीर' यानी मोनेस्ट्री तक ज़रूर पहुँचिये। यह खज़़ने से भी बड़ा और भव्य है। जब यहाँ से शाम का ढलता हुआ सूरज पहाड़ों को विदा कहता है, तो पूरी वादी एक जादुई चमक से भर जाती है। पेट्रा हमें सिखाता है कि इंसान अगर ठान ले, तो वह पहाड़ों का सीना चीरकर भी अपना घर बना सकता है। उम्मीद है इस गुलाबी शहर की धूल और इसकी कहानियाँ आपके दिल में हमेशा के लिए बस जाएंगी। अब आप अपनी रफ़्तार से इन रास्तों को और गहराई से देख सकते हैं। धन्यवाद।