The story
नमस्कार, मैं हूँ अव्शा। आज मैं आपको टोक्यो के सबसे पुराने और सबसे प्रतिष्ठित मंदिर, सेनसो-जी की एक अविस्मरणीय यात्रा पर ले चलूँगी। जैसे ही आप अस्काकुसा के इस क्षेत्र में कदम रखते हैं, आपको आधुनिक गगनचुंबी इमारतों के बीच एक प्राचीन जापान की धड़कन महसूस होगी। यहाँ की हवा में धूप और अगरबत्तियों की खुशबू घुली हुई है, जो सदियों पुराने इतिहास की गवाह है। अपने ठीक सामने उस विशाल लाल गेट को देखिए। यह है कमीनारीमोन, यानी बिजली का दरवाज़ा। इस गेट के बीचों-बीच लटके उस विशाल लाल लालटेन पर गौर कीजिए। यह लगभग ७०० किलो वजनी है और इसके नीचे की तरफ उकेरे गए ड्रैगन की कलाकृति को देखना न भूलें। गेट के दोनों तरफ हवा के देवता फुजिन और गरज के देवता रायजिन की डरावनी लेकिन सुरक्षात्मक मूर्तियाँ खड़ी हैं। माना जाता है कि ये देवता इस पवित्र स्थान को बुराइयों से बचाते हैं। जैसे ही आप इस गेट को पार करते हैं, आप नाकामिसे-दोरी की चहल-पहल वाली गली में पहुँच जाते हैं। यह करीब २५० मीटर लंबी जादुई गली है जहाँ दुकानों की कतारें लगी हैं। यहाँ की रौनक आपको मंत्रमुग्ध कर देगी। मैं आपको सुझाव दूँगी कि यहाँ के मशहूर निंग्यो-याकी, जो छोटी गुड़ियों के आकार के केक होते हैं, या फिर कुरकुरे सेंबेई का स्वाद ज़रूर लें। ये दुकानें यहाँ एडो काल से पर्यटकों का स्वागत कर रही हैं। अब हम दूसरे बड़े गेट, होजोमोन के पास पहुँचते हैं। इस गेट के पीछे की तरफ लटके हुए उन विशाल जूतों को देखिए। इन्हें ओ-वाराजी कहते हैं। ये भूसे से बने विशाल सैंडल इस बात का प्रतीक हैं कि बुद्ध की शक्ति और उनके कदम कितने महान हैं। इस मंदिर के पीछे एक बहुत ही दिलचस्प कहानी है। बात सन् ६२८ की है, जब दो मछुआरे भाई, हिनोकुमा हमनारी और ताकेनरी, पास की सुमिदा नदी में मछली पकड़ रहे थे। उनके जाल में मछली की जगह दया की देवी, बोधिसत्व कानोन की एक सुनहरी मूर्ति फँस गई। उन्होंने उस मूर्ति को वापस नदी में फेंक दिया, लेकिन वह बार-बार उनके जाल में वापस आ जाती थी। आखिरकार, उन्होंने इसे ईश्वरीय संकेत माना और यहाँ एक छोटे से मंदिर की स्थापना की, जो आज इस भव्य रूप में खड़ा है। अब हम मुख्य हॉल की ओर बढ़ रहे हैं। यहाँ सीढ़ियों के पास उस विशाल अगरबत्ती के पात्र, जोकोरो को देखें। यहाँ लोग अपने हाथों से धुएं को अपने शरीर की तरफ खींचते हैं। ऐसी मान्यता है कि यह पवित्र धुआं आपको स्वस्थ रखता है और आपकी बुद्धि बढ़ाता है। अपनी दाईं ओर देखिए, वह शानदार पाँच मंजिला पगोडा टोक्यो के आकाश में सिर उठाए खड़ा है। यह पगोडा जापानी वास्तुकला का अद्भुत नमूना है और आत्म-त्याग व शांति का संदेश देता है। सेनसो-जी केवल पत्थरों और लकड़ी का ढांचा नहीं है, यह टोक्यो की अटूट आस्था का केंद्र है। यहाँ की घंटियों की गूँज और भक्तों की प्रार्थनाएँ हमें याद दिलाती हैं कि समय चाहे कितना भी बदल जाए, श्रद्धा हमेशा अमर रहती है। इस शांति को अपने भीतर समेट लीजिए और अस्काकुसा की इस आध्यात्मिक ऊर्जा का आनंद लेते रहें।