The story of The Forbidden City · 3 min · HI

बेइजिंग का निषिद्ध शहर: सम्राटों की रहस्यमयी दुनिया

A narrated story about The Forbidden City — press play, or read it below.

Avsha narrates a story about wherever you are — any street, in your language. Free to start, no account.

The story

नमस्ते, मैं हूँ अव्शा। आज हम चीन की राजधानी बेइजिंग के उस धड़कते हुए दिल में खड़े हैं, जिसे कभी 'दुनिया का केंद्र' माना जाता था। मेरे सामने खड़ा यह विशाल और भव्य द्वार 'मेरिडियन गेट' है। ज़रा अपनी नज़रें ऊपर उठाइए और इन गहरी लाल दीवारों और चमकती सुनहरी छतों को देखिये। आप इस समय 'फॉरबिडन सिटी' यानी निषिद्ध शहर के मुहाने पर हैं। पाँच सौ सालों तक, यहाँ की हवाओं में सिर्फ सम्राटों, उनकी रानियों और वफादार दरबारियों की साँसे घुली थीं। किसी भी आम इंसान का यहाँ कदम रखना मौत को दावत देने जैसा था। जैसे ही हम इस मुख्य द्वार से अंदर कदम रखते हैं, पत्थरों से बनी यह विशाल ज़मीन और सफेद संगमरमर के पाँच पुल आपका स्वागत करते हैं। यहाँ की शांति में आज भी सदियों पुराना वैभव और शक्ति छिपी है। इस अद्भुत शहर का निर्माण सन् चौदह सौ छह में मिंग राजवंश के दौरान शुरू हुआ था। कल्पना कीजिए, इसे मुकम्मल बनाने में दस लाख से भी ज़्यादा मज़दूरों और हज़ारों कलाकारों ने अपना खून-पसीना बहाया था। एक मशहूर लोककथा के अनुसार, यहाँ कुल नौ हज़ार नौ सौ निन्यानवे और आधा कमरे हैं। आधा कमरा इसलिए रखा गया क्योंकि पूरा दस हज़ार का अंक केवल स्वर्ग के देवता के लिए सुरक्षित माना जाता था। अब मेरे साथ आगे बढ़िए उस सबसे भव्य इमारत की ओर जिसे 'हॉल ऑफ सुप्रीम हार्मनी' कहा जाता है। यह इस पूरे परिसर का सबसे महत्वपूर्ण और ऊंचा हिस्सा है। यहाँ सम्राट का वह प्रसिद्ध सिंहासन है, जहाँ बैठकर वे पूरे विशाल चीन पर शासन करते थे। गौर से देखिये, खंभों से लेकर छतों तक, हर तरफ ड्रैगन की आकृतियाँ बनी हैं। चीनी संस्कृति में ड्रैगन शक्ति और सम्राट का प्रतीक है। क्या आपने ध्यान दिया कि यहाँ की छतों पर लगी टाइल्स का रंग चटख पीला है? प्राचीन चीन में पीला रंग सिर्फ सम्राट के लिए आरक्षित था, किसी और को इसे इस्तेमाल करने की इजाज़त नहीं थी। यहाँ की भूलभुलैया जैसी गलियों में चलते हुए आपको दीवारों की नक्काशी और छतों की बारीकियों में एक कड़ा अनुशासन दिखेगा। हर पत्थर, हर सीढ़ी एक खास वास्तु और खगोलीय दिशा के हिसाब से रखी गई है। ज़रा सोचिये, इतिहास की कितनी बड़ी-बड़ी साजिशें, राजनैतिक फैसले और जश्न इन्हीं दीवारों के भीतर सिमटे रहे होंगे। जैसे-जैसे हम परिसर के पिछले हिस्से की ओर बढ़ते हैं, पत्थरों का यह विशाल साम्राज्य धीरे-धीरे खत्म होता है और शुरू होता है 'इंपीरियल गार्डन'। यहाँ के सदियों पुराने टेढ़े-मेढ़े पेड़, कलात्मक चट्टानें और शांत मंडप आपको सम्राटों के निजी और एकांत जीवन की एक कोमल झलक दिखाते हैं। यहाँ वे राजकाज की थकान मिटाते थे और प्रकृति के सानिध्य में समय बिताते थे। जब हम उत्तरी द्वार से बाहर निकलेंगे, तो आप पीछे मुड़कर एक आखिरी बार इन अजेय दीवारों को ज़रूर देखिएगा। यह सिर्फ लकड़ी और पत्थर का ढांचा नहीं है, बल्कि एक महान सभ्यता की वह गौरवगाथा है जो आज भी अपने सीने में कई अनकहे राज़ दबाए शान से खड़ी है। बेइजिंग के इस ऐतिहासिक सफर में मेरे साथ जुड़ने के लिए आपका शुक्रिया।

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