The story of The Taj Mahal · 3 min · HI

मोहब्बत की अमर निशानी: ताज महल

A narrated story about The Taj Mahal — press play, or read it below.

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3 min · narrated · free

In short: मुगल बादशाह शाहजहाँ ने अपनी बेगम मुमताज़ महल की याद में ताज महल बनवाया था। इसे पूरा करने में 22 साल लगे और करीब 20,000 कारीगरों ने इसमें दिन-रात मेहनत की।

Avsha narrates a story about wherever you are — any street, in your language. Free to start, no account.

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The story

नमस्ते, मैं हूँ अवशा, और आज मैं आपको दुनिया के सबसे खूबसूरत अजूबों में से एक, ताज महल की सैर पर ले चलूँगी। आगरा की इस तपती धूप और यमुना नदी की मंद लहरों के बीच, हम उस दास्तान को महसूस करेंगे जो आज से चार सौ साल पहले शुरू हुई थी। जैसे-जैसे आप मुख्य प्रवेश द्वार की ओर बढ़ते हैं, जिसे 'दरवाज़ा-ए-रौज़ा' कहा जाता है, अपने चारों ओर की भीड़ और शोर को भूल जाइए। इस विशाल लाल बलुआ पत्थर के दरवाज़े से गुज़रते ही, सामने जो नज़ारा दिखता है, वह किसी सपने से कम नहीं है। सफ़ेद संगमरमर की वह भव्य इमारत, जो नीले आसमान के नीचे शान से खड़ी है, सिर्फ़ एक मक़बरा नहीं है। यह मुगल बादशाह शाहजहाँ का अपनी बेगम मुमताज़ महल के लिए वह प्यार है, जिसे उन्होंने पत्थर पर उकेर दिया था। 1631 में जब मुमताज़ का निधन हुआ, तो शाहजहाँ ने वादा किया था कि वह दुनिया की सबसे खूबसूरत इमारत बनाएंगे। इसे पूरा करने में 22 साल लगे और करीब 20,000 कारीगरों ने दिन-रात मेहनत की। ज़रा गौर से देखिए उन चार मीनारों को जो मुख्य गुंबद के चारों कोनों पर खड़ी हैं। क्या आपको पता है कि ये मीनारें बिल्कुल सीधी नहीं, बल्कि हल्की सी बाहर की ओर झुकी हुई हैं? ऐसा इसलिए किया गया था ताकि अगर कभी ज़ोरदार भूकंप आए, तो ये मीनारें बाहर की तरफ गिरें और मुख्य गुंबद को कोई नुकसान न पहुँचे। उस दौर की इंजीनियरिंग और समझ वाकई हैरान कर देने वाली है। जैसे-जैसे आप ताज महल के मुख्य चबूतरे की ओर बढ़ेंगे, आपको संगमरमर पर की गई बारीक नक्काशी दिखाई देगी। इसे 'पिएत्रा ड्यूरा' कहते हैं। इसमें नीलम, पन्ना और मूनस्टोन जैसे कीमती पत्थरों को तराश कर संगमरमर के अंदर जड़ा गया है। जब सूरज की किरणें इन पर पड़ती हैं, तो ये दीवारें चमक उठती हैं। कहते हैं कि ताज महल दिन के हर पहर अपना रंग बदलता है—सुबह की पहली किरण में यह हल्का गुलाबी नज़र आता है, दोपहर की तेज़ धूप में चमकीला सफ़ेद, और चांदनी रात में यह हल्के नीले या सुनहरे रंग की चादर ओढ़े हुए प्रतीत होता है। अंदर मुख्य कक्ष में जब आप कदम रखेंगे, तो वहाँ की खामोशी और गूँज आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाएगी। बीच में मुमताज़ महल और उनके बगल में शाहजहाँ की कब्रें बनी हैं, हालांकि उनकी असली मज़ारें नीचे एक तहखाने में सुरक्षित हैं। यहाँ खड़े होकर बस एक पल के लिए अपनी आँखें बंद कीजिए। यमुना की ठंडी हवा और इस वास्तुकला की भव्यता को महसूस कीजिए। यह जगह हमें याद दिलाती है कि वक्त गुज़र जाता है, हुकूमतें बदल जाती हैं, लेकिन कला और मोहब्बत हमेशा के लिए अमर हो जाते हैं। जब आप आज यहाँ से रुखसत होंगे, तो अपने साथ सिर्फ़ तस्वीरें नहीं, बल्कि उस रूहानी सुकून को भी ले जाइएगा जो सिर्फ़ आगरा के इस ताज में बसता है।

That was The Taj Mahal. Avsha tells a story like this about wherever you are — any street, in your language.

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