The story of Angkor Wat · 3 min · HI

अंगकोर वाट: पत्थरों पर खुदा देवताओं का महाकाव्य

A narrated story about Angkor Wat — press play, or read it below.

Avsha narrates a story about wherever you are — any street, in your language. Free to start, no account.

The story

नमस्ते, मैं हूँ अवशा, आपकी टूर नैरेटर। आज हम कंबोडिया के सिएम रीप शहर की उस पवित्र धरती पर खड़े हैं, जहाँ इतिहास की गूँज आज भी हवाओं में महसूस की जा सकती है। अपने सामने देखिए, यह है अंगकोर वाट—दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक स्मारक। यह सिर्फ पत्थरों का एक ढांचा नहीं है, बल्कि खमेर साम्राज्य की शक्ति, कला और अटूट विश्वास का प्रतीक है। जैसे ही आप इस विशाल खाई यानी मोट को पार करते हैं, कल्पना कीजिए कि आप आम दुनिया को पीछे छोड़कर देवताओं के निवास स्थान की ओर बढ़ रहे हैं। यह खाई साढ़े छह सौ फीट चौड़ी है और ब्रह्मांड के पौराणिक महासागरों का प्रतिनिधित्व करती है। बारहवीं शताब्दी में राजा सूर्यवर्मन द्वितीय ने भगवान विष्णु के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने के लिए इसे बनवाया था। लेकिन क्या आप जानते हैं? राजा इसे अपनी कब्रगाह के रूप में भी देखते थे, इसीलिए इसका मुख पूर्व की बजाय पश्चिम दिशा की ओर है, जो मृत्यु और सूर्यास्त की दिशा मानी जाती है। जैसे-जैसे आप मुख्य मंदिर की ओर बढ़ेंगे, आपकी नज़र उन पांच भव्य शिखरों पर पड़ेगी। ये 'क्विंनकुंक्स' आकार में बने शिखर हिंदू पौराणिक कथाओं के 'माउंट मेरु' का प्रतीक हैं, जिसे देवताओं का घर माना जाता है। इस मंदिर को बनाने में करीब पांच लाख टन बलुआ पत्थर का इस्तेमाल हुआ था, जिसे मीलों दूर पहाड़ों से हाथियों और नावों के ज़रिए यहाँ लाया गया था। अब ज़रा मंदिर की बाहरी दीवारों पर बनी बारीक नक्काशी को देखिए। यहाँ 'समुद्र मंथन' का वह मशहूर दृश्य उकेरा गया है, जहाँ देवता और असुर अमृत के लिए वासुकि नाग को रस्सी बनाकर मंदार पर्वत को मथ रहे हैं। इन दीवारों पर दो हज़ार से भी ज़्यादा 'अप्सराओं' या दिव्य नर्तकियों की मूर्तियाँ हैं। गौर से देखने पर आप पाएंगे कि हर अप्सरा की मुस्कान, उनके गहने और यहाँ तक कि उनके बालों का स्टाइल भी एक-दूसरे से अलग है। समय के साथ, पंद्रहवीं शताब्दी के आसपास, यह हिंदू मंदिर धीरे-धीरे एक बौद्ध तीर्थ स्थल में बदल गया। आज भी आप यहाँ नारंगी वस्त्रों में बौद्ध भिक्षुओं को प्रार्थना करते देख सकते हैं, जो इस प्राचीन जगह में आध्यात्मिक शांति भर देते हैं। सिएम रीप की इस उमस भरी हवा में, जब सूरज की पहली किरणें इन मीनारों के पीछे से निकलती हैं, तो पूरा मंदिर सुनहरी चमक से भर उठता है। वह पल हमें याद दिलाता है कि भले ही साम्राज्य गिर गए हों, लेकिन इंसानी हुनर और आस्था के ये निशान आज भी अमर हैं। अब अपनी आँखें बंद करें, यहाँ की शांत घंटी की आवाज़ सुनें और कल्पना करें कि आप उस दौर में हैं जब यह जगह पूरी दुनिया का केंद्र हुआ करती थी। चलिए, अब हम इस मंदिर के गर्भ गृह की ओर बढ़ते हैं, जहाँ सदियों का रहस्य आज भी सुरक्षित है।

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