The story
नमस्ते, मैं हूँ आपकी गाइड अवशा। रियो डी जेनेरो की इस खुशनुमा धूप में आपका स्वागत है। आज हम एक ऐसी जगह की यात्रा कर रहे हैं जो न केवल ब्राजील की पहचान है, बल्कि दुनिया के सात अजूबों में से एक है। अपनी आँखें बंद करें और महसूस करें कि आप तिजुका नेशनल पार्क की घनी हरियाली के बीच से गुजर रहे हैं। जैसे-जैसे हम कोर्कोवाडो पर्वत की सात सौ मीटर ऊँची चोटी की ओर बढ़ते हैं, शहर का शोर धीरे-धीरे पीछे छूटने लगता है और अटलांटिक वर्षावन की ताजी हवा हमें अपनी आगोश में ले लेती है। अब अपने सामने देखिए। यहाँ खड़ी है दुनिया की सबसे प्रसिद्ध प्रतिमा—क्राइस्ट द रिडीमर, यानी 'ओ क्रिस्टो रेडेंटोर'। बादलों को छूती हुई यह विशाल मूर्ति अपने हाथ फैलाए खड़ी है, मानो पूरे रियो शहर को गले लगा रही हो। क्या आप जानते हैं कि ईसा मसीह की इस प्रतिमा की ऊँचाई लगभग 30 मीटर है? और इसके फैले हुए हाथों की दूरी 28 मीटर है। इस कलाकृति को आर्ट डेको शैली में बनाया गया है, जो इसकी भव्यता में चार चाँद लगा देती है। इस महान स्मारक के पीछे की कहानी भी उतनी ही दिलचस्प है जितनी कि यह प्रतिमा। इसकी कल्पना 1850 के दशक में की गई थी, लेकिन इसका निर्माण कार्य 1922 में ब्राजील की स्वतंत्रता के सौ साल पूरे होने के अवसर पर शुरू हुआ। इसे बनाने में नौ साल का समय लगा। इसके मुख्य वास्तुकार ब्राजीलियाई इंजीनियर हीटर दा सिल्वा कोस्टा थे, लेकिन इसका चेहरा और हाथ फ्रांसीसी मूर्तिकार पॉल लैंडोव्स्की ने तैयार किए थे। अगर आप ध्यान से मूर्ति की सतह को देखेंगे, तो आपको हजारों छोटे-छोटे तिकोने पत्थर दिखाई देंगे। ये 'सोपस्टोन' के टुकड़े हैं। इंजीनियरों ने कंक्रीट के ऊपर सोपस्टोन की परतों का इस्तेमाल इसलिए किया क्योंकि यह पत्थर बहुत टिकाऊ होता है और रियो के कड़े मौसम और बिजली गिरने का सामना कर सकता है। जरा चारों तरफ मुड़कर देखें। यहाँ से दिखने वाला नजारा आपका दिल जीत लेगा। एक तरफ आपको नीले रंग की गुआनाबारा खाड़ी दिखेगी, तो दूसरी ओर प्रसिद्ध मारकाना स्टेडियम। दूर क्षितिज पर शुगरलोफ माउंटेन किसी प्रहरी की तरह खड़ा नजर आता है। स्थानीय लोग कहते हैं कि जब आप यहाँ खड़े होते हैं, तो आपको महसूस होता है कि रियो के लोग कितने मिलनसार और खुले दिल के हैं, ठीक इस प्रतिमा के खुले हाथों की तरह। चाहे आप यहाँ पैदल चलकर आए हों, या उस छोटी सी ऐतिहासिक ट्रेन से जो जंगलों के बीच से होकर गुजरती है, यहाँ आकर शांति का जो अहसास होता है, वह शब्दों से परे है। यह केवल पत्थर और कंक्रीट का ढांचा नहीं है, बल्कि ब्राजील की अटूट आस्था और उनके प्रेम का प्रतीक है। उम्मीद है कि क्राइस्ट द रिडीमर की इस छाया में बिताए ये पल आपकी रियो की यात्रा की सबसे खूबसूरत याद बनेंगे। चलिए, अब इस अद्भुत दृश्य को अपनी यादों में बसाते हुए आगे बढ़ते हैं।
That was Christ the Redeemer. Avsha tells a story like this about wherever you are — any street, in your language.
Free to start, no account.