The story of Victoria Falls · 3 min · HI

विक्टोरिया फॉल्स: गूँजता हुआ धुआँ और कुदरत का करिश्मा

A narrated story about Victoria Falls — press play, or read it below.

Avsha narrates a story about wherever you are — any street, in your language. Free to start, no account.

The story

नमस्ते, मैं हूँ अव्शा, आपकी टूर गाइड। आज हम उस जगह खड़े हैं जहाँ धरती काँप उठती है और आसमान पानी की फुहारों से भर जाता है। ज़ाम्बिया और ज़िम्बाब्वे की सीमा पर बसे लिविंगस्टन के इस जादुई नज़ारे में आपका स्वागत है। अपने चारों तरफ देखिए। क्या आप उस गूँज को महसूस कर सकते हैं? इसे यहाँ के स्थानीय लोग सदियों से 'मोसी-ओ-तुल्या' कहते आए हैं, जिसका मतलब है 'गरजता हुआ धुआँ'। और जब आप सामने की ओर देखते हैं, तो समझ आता है कि यह नाम कितना सटीक है। ज़म्बेज़ी नदी का यह शांत नीला पानी अचानक से एक विशाल खाई में गिरकर सफ़ेद झाग और धुएँ में बदल जाता है। यह दुनिया का सबसे चौड़ा गिरता हुआ पानी का पर्दा है। अगर आप इस वक्त नाइफ एज ब्रिज पर खड़े हैं, तो आप महसूस करेंगे कि यहाँ की हवा हमेशा गीली रहती है। यह बारिश नहीं है, बल्कि झरने से उठने वाली वह फुहार है जो कभी-कभी एक किलोमीटर ऊपर तक जाती है। इतिहास की बात करें तो, नवंबर 1855 में स्कॉटिश खोजी डेविड लिविंगस्टन ने जब पहली बार इसे देखा, तो उन्होंने लिखा था कि इतने सुंदर दृश्य को स्वर्ग में उड़ते हुए फरिश्ते भी रुककर निहारते होंगे। उन्हीं के नाम पर इस पास के शहर का नाम लिविंगस्टन पड़ा। लेकिन यहाँ की कहानियाँ डेविड लिविंगस्टन से भी बहुत पुरानी हैं। यहाँ रहने वाले टोंगा जनजाति के लोग मानते हैं कि इस नदी में 'न्यामी न्यामी' नाम का एक जल-देवता रहता है, जिसका सिर मछली जैसा और शरीर साँप जैसा है। कहते हैं कि ज़म्बेज़ी नदी की लहरों में आज भी उनकी रूह बसती है। ज़रा उस लोहे के पुल की ओर देखिए जो दो देशों को जोड़ता है। यह विक्टोरिया फॉल्स ब्रिज है। इसे 1905 में बनाया गया था। सेसिल रोड्स का सपना था कि यहाँ से गुजरने वाली ट्रेन के डिब्बों पर झरने की फुहारें गिरें। आज भी, जब आप यहाँ से गुजरते हैं, तो आपको ज़िम्बाब्वे और ज़ाम्बिया दोनों का अद्भुत नज़ारा एक साथ मिलता है। अगर आप रोमांच के शौकीन हैं, तो आपने 'डेविल्स पूल' के बारे में सुना होगा, जो ठीक झरने के किनारे पर स्थित एक प्राकृतिक पूल है। लेकिन अगर आप सिर्फ शांति से इस कुदरत को महसूस करना चाहते हैं, तो बस यहाँ के रेनफॉरेस्ट में टहलते रहिए। यहाँ की हरियाली और फूलों की महक इस शोर के बीच एक अजीब सा सुकून देती है। जैसे-जैसे सूरज ढलता है, यहाँ अक्सर एक दुर्लभ नज़ारा देखने को मिलता है जिसे 'मून-बो' कहते हैं—यानी चाँद की रोशनी में बनने वाला इंद्रधनुष। अपनी आँखें बंद कीजिए और इस ठंडी फुहार को अपने चेहरे पर महसूस कीजिए। यह सिर्फ एक झरना नहीं है, यह प्रकृति की एक महान ताकत है। अपनी यात्रा जारी रखें और ध्यान रहे, रास्ते थोड़े फिसलन भरे हो सकते हैं, इसलिए कदम सँभालकर रखिएगा। चलिए, इस गरजते हुए धुएँ की गहराई को और करीब से देखते हैं।

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