The story
नमस्ते, मैं हूँ आपकी गाइड अव्शा। आज मैं आपको दुनिया की सबसे मशहूर और खूबसूरत इमारतों में से एक, सिडनी ओपेरा हाउस की सैर पर ले चल रही हूँ। इस वक्त आप सिडनी हार्बर के किनारे बेनलोंग पॉइंट पर खड़े हैं। अपने चारों ओर देखिए। आपके सामने नीले समंदर की लहरें हैं, ऊपर खुला आसमान और ठीक आपके सामने खड़ा है यह सफ़ेद अजूबा, जिसकी छतें समंदर में तैरते हुए जहाजों के पाल जैसी लगती हैं। इस जगह का इतिहास बहुत पुराना है। सिडनी ओपेरा हाउस बनने से पहले, यह ज़मीन ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासी गडिगल लोगों के लिए एक खास जगह थी। वे यहाँ उत्सव मनाते और मछलियाँ पकड़ते थे। लेकिन 1950 के दशक में सिडनी शहर को एक ऐसी पहचान की तलाश थी जो इसे दुनिया के नक्शे पर चमका दे। इसके लिए एक अंतरराष्ट्रीय डिज़ाइन प्रतियोगिता रखी गई, जिसमें पूरी दुनिया से 233 प्रस्ताव आए। विजेता रहे डेनमार्क के एक अनजान से आर्किटेक्ट, जोर्न उत्ज़ोन। दिलचस्प बात यह है कि उत्ज़ोन के डिज़ाइन को पहले जजों ने खारिज कर दिया था, लेकिन एक जज ने इसे कचरे के ढेर से निकाला और कहा कि यह डिज़ाइन दुनिया बदल देगा। जब आप इन विशाल सफ़ेद छतों को देखते हैं, जिन्हें 'सेल्स' कहा जाता है, तो सोचिए कि इन्हें बनाना कितना मुश्किल रहा होगा। उत्ज़ोन को इन छतों का विचार एक संतरे को छीलते हुए आया था। ये सभी छतें एक ही काल्पनिक गोले का हिस्सा हैं। अगर आप करीब जाकर देखें, तो ये छतें सिर्फ सादी कंक्रीट नहीं हैं। इन पर दस लाख से भी ज्यादा स्वीडिश सिरेमिक टाइलें लगी हैं। ये टाइलें खास तौर पर इस तरह बनाई गई हैं कि ये सूरज की रोशनी में चमकती हैं और खुद को साफ भी रखती हैं। इस इमारत को पूरा होने में 14 साल लगे और इसका बजट भी काफी बढ़ गया था, जिसकी वजह से बहुत विवाद हुआ। यहाँ तक कि उत्ज़ोन ने काम पूरा होने से पहले ही ऑस्ट्रेलिया छोड़ दिया और फिर कभी लौटकर अपनी इस महान रचना को नहीं देखा। आखिरकार 1973 में रानी एलिजाबेथ द्वितीय ने इसका उद्घाटन किया। आज यहाँ हर साल 1500 से भी ज्यादा परफॉर्मेंस होती हैं। इसके अंदर 'कॉन्सर्ट हॉल' में दुनिया का सबसे बड़ा मैकेनिकल ऑर्गन है, जिसमें दस हजार से ज्यादा पाइप लगे हैं। अब आप धीरे-धीरे इन सीढ़ियों पर टहलते हुए आगे बढ़िए। यहाँ की हवा में समंदर की नमक वाली खुशबू महसूस कीजिए। अपने दाहिनी ओर देखें तो आपको मशहूर हार्बर ब्रिज दिखाई देगा। यहाँ बैठकर ओपेरा हाउस की भव्यता को देखना एक जादुई अनुभव है। यह सिर्फ एक इमारत नहीं है, यह इंसानी कल्पना और ज़िद की जीत है। आप जब भी यहाँ से गुजरें, याद रखिएगा कि एक कलाकार का सपना कैसे पत्थरों और टाइल्स के जरिए अमर हो गया। चलिए, अब हम इस अद्भुत वास्तुशिल्प के अगले हिस्से की ओर बढ़ते हैं।